CBSE Board: विदेशी बोर्डों से पढ़े छात्रों के लिए प्रवेश प्रक्रिया को किया आसान, जाने क्या है नया निर्देश ?

कोरोना वायरस महामारी ने पुरी दुनिया में अपना प्रकोप दिखाया, इसकी वजह से कई लोगों की नौकरी छूटी तो कितनों को वापस अपने घर लौटना पड़ा।

कोरोना संकट के चलते विदेश में पढ़ने वाले कई छात्रों को वापस भारत आना पड़ा और वो अब यहीं से अपनी आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं।

सीबीएसई बोर्ड में एडमिशन के ऐसे ही इच्छुक छात्रों के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले से छात्र देश में किसी भी सीबीएसई बोर्ड के स्कूल में एडमिशन करा सकते हैं।

दरअसल, गुरुवार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की विदेश में पढ़ने वाले छात्र, जो सीबीएसई के संबद्ध स्कूलों में एडमिशन लेना चाहते हैं उनके लिए पिछले बोर्ड के पूर्व स्वीकृति पत्र को जरूरी दस्तावेज की लिस्ट से हटा दिया गया है।

अब विदेशी छात्र चाहे तो सीबीएसई के किसी भी स्कूल में बिना पूर्वानुमति (ट्रांसफर लेटर) के भी एडमिशन ले सकता है।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अपने एक प्रेस रिलीज में कहा, विदेशी बोर्डों में विदेशों में पढ़ने वाले कई छात्र सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में शामिल हो रहे हैं।

ऐसे में सीबीएसई ने फैसला किया है कि अब सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए बोर्ड के छात्रों द्वारा किसी पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है।

Many students studying abroad in foreign Boards are joining schools affiliated with CBSE…CBSE has decided that now onward, no prior approval is required by the students from the Board to seek admission in the schools affiliated to the CBSE: Central Board of Secondary Education

सीबीएसई के इस फैसले से विदेशी छात्रों और उनके अभिभावकों को बड़ी राहत पहुंची है। इससे हजारों ऐसे बच्चों और अभिभावकों को राहत की सांस मिली है जो महामारी के दौर में विदेशों से भारत वापस आए हैं।

सीबीएसई की तरफ से कहा गया कि कोरोना महामारी के बाद कई परिवार विभिन्न कारणों से भारत में स्थानांतरित हुए हैं।

इसलिए विदेशी बोर्ड के छात्रों को संबंधित बोर्ड द्वारा किसी पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता को समाप्त किया जा रहा है।

बता दें कि दो अलग-अलग बोर्ड की कक्षाओं की समानता के आधार पर अन्य बोर्डों के छात्रों को प्रवेश दिया जाता है।

छात्रों के बेहतर भविष्य के लिए सीबीएसई ने वर्तमान परिस्थितियों और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ये बड़ा फैसला किया है।