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प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर ब्रेक? Intake Capacity जांच के बाद होगा बड़ा फैसला!

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प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर ब्रेक? Intake Capacity जांच के बाद होगा बड़ा फैसला!

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Intake Capacity में गड़बड़ी पर सख्त हुआ शिक्षा विभाग, हजारों निजी स्कूलों पर होगी कार्रवाई

बिहार में इन दिनों शिक्षा विभाग निजी स्कूलों के रिकॉर्ड को लेकर काफी एक्टिव दिख रहा है। हाल की समीक्षा में पता चला कि कई प्राइवेट स्कूलों ने पोर्टल पर अपनी Intake Capacity, यानी उनके यहाँ कितनी सीटें हैं, उसकी जानकारी ठीक से नहीं भरी है। कहीं डेटा अधूरा है, तो कहीं गलत एंट्री कर दी गई है। इसी बात को लेकर अब विभाग ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है।

हजारों स्कूलों में गड़बड़ी सामने आई

अंदर की जानकारी के मुताबिक RTE से जुड़े 3014 मामले पहले से ही लंबित पड़े थे। अब इसके अलावा करीब 4602 निजी स्कूल ऐसे मिले हैं जहाँ सीट क्षमता की जानकारी या तो भरी ही नहीं गई, या सही तरीके से अपडेट नहीं हुई। सीधी बात कहें तो रिकॉर्ड गड़बड़ मिला है, और यही वजह है कि ऊपर से नीचे तक सबको रिपोर्ट देने को कहा गया है।

अधिकारियों को साफ-साफ कहा गया क्या करना है

मीटिंग में अधिकारियों को कहा गया कि हर स्कूल का डेटा दोबारा चेक करें।
मतलब:

  • पोर्टल पर जो Intake Capacity लिखी है, उसे स्कूल के असली रजिस्टर से मिलाएँ
  • जहाँ गड़बड़ी दिखे, तुरंत ठीक करवाएँ
  • जो पुराने RTE वाले केस लटके हैं, उन्हें भी क्लियर करें

इस बार टोन थोड़ा सख्त बताया जा रहा है, यानी “चल जाएगा” वाला मूड नहीं है।

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर ब्रेक: 14 फरवरी तक मांगी गई पूरी रिपोर्ट

सभी जिलों से कहा गया है कि 14 फरवरी तक पूरी जांच खत्म करके रिपोर्ट भेज दें। उसके बाद ही तय होगा कि किस स्कूल ने सिर्फ लापरवाही की और कहाँ नियम तोड़ने वाली बात है। विभाग का इशारा साफ है—गड़बड़ी पक्की मिली तो कार्रवाई होगी।

पहले भी बोला गया था, फिर भी काम ढीला रहा

बताया जा रहा है कि 25 जनवरी को ही नीचे के अधिकारियों को बोल दिया गया था कि स्कूलों की Intake Capacity सही-सही भरवा दें। लेकिन कई जगह काम अधूरा रह गया। इसी पर अब ऊपर के अधिकारी नाराज़ भी दिखे—क्योंकि एक ही बात दोबारा क्यों बोलनी पड़ रही है।

नए सत्र के एडमिशन में भी फाइलें अटकी पड़ी हैं

2026–27 सत्र के लिए काफी आवेदन आए हैं, लेकिन आधे से ज्यादा अभी तक वेरिफाई नहीं हुए।

  • कुल आवेदन: 65,505
  • लंबित सत्यापन: 34,374

यानी कागज अभी भी टेबल पर ही पड़े हैं। विभाग ने साफ कहा है—पहले वेरिफिकेशन पूरा करो, तभी आगे का काम ठीक से चलेगा।

स्कूलों को मिलने वाले पैसे भी इसी पर टिके हैं

RTE के तहत जिन बच्चों को निजी स्कूलों में एडमिशन मिलता है, उसके बदले सरकार स्कूलों को पैसा देती है। लेकिन ये भुगतान तभी आगे बढ़ता है जब जिले अपनी जांच रिपोर्ट समय पर पोर्टल पर डाल दें। जहाँ रिपोर्ट नहीं गई है, वहाँ पेमेंट अटक भी सकता है—इसीलिए सबको जल्दी करने को कहा गया है।

अब आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल विभाग का फोकस रिकॉर्ड साफ करने पर है, लेकिन ये भी साफ कर दिया गया है कि:

  • Intake Capacity गलत भरने वालों से जवाब माँगा जाएगा
  • जरूरत पड़ी तो नोटिस भी जा सकता है
  • आगे से ऐसी ढिलाई न हो, इसके लिए निगरानी टाइट की जाएगी

सीधी भाषा में कहें तो—अभी चेतावनी वाला फेज है, लेकिन रिपोर्ट के बाद असली एक्शन भी दिख सकता है।

कुल मिलाकर

सरकार चाहती है कि प्राइवेट स्कूल जितनी सीट है उतना ही दिखाएँ, और RTE का पूरा हिसाब-किताब साफ रहे। 14 फरवरी के बाद जब जिलों की रिपोर्ट आएगी, तब तस्वीर और क्लियर होगी—कौन सा स्कूल सिर्फ कागज ठीक करेगा और कहाँ सच में कार्रवाई पड़ेगी। अभी माहौल थोड़ा टाइट है, ये तो तय है।