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बिहार के स्कूलों में बड़ा बदलाव: दो करोड़ छात्रों की हाज़िरी अब टैबलेट से होगी दर्ज, जानें पूरी प्रक्रिया…

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बिहार के स्कूलों में बड़ा बदलाव: दो करोड़ छात्रों की हाज़िरी अब टैबलेट से होगी दर्ज, जानें पूरी प्रक्रिया…

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बिहार के 75 हजार स्कूलों में अब टैब से लगेगी हाजिरी

बिहार के स्कूलों में बड़ा बदलाव: बिहार सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। शिक्षा विभाग ने तय किया है कि राज्य के करीब 75 हजार सरकारी स्कूलों में अब छात्रों और शिक्षकों की उपस्थिति टैब के माध्यम से दर्ज की जाएगी। इस नई डिजिटल व्यवस्था को अगले महीने से पूरे राज्य में लागू करने की तैयारी कर ली गई है। इसके लागू होते ही लगभग दो करोड़ छात्र और करीब छह लाख शिक्षक इस प्रणाली से सीधे तौर पर जुड़ जाएंगे।

अगले महीने से लागू होगी नई डिजिटल व्यवस्था

शिक्षा विभाग की ओर से सभी जिलों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं। विभाग ने कहा है कि सभी स्कूलों को समय रहते तकनीकी रूप से तैयार रहना होगा। टैब आधारित हाजिरी व्यवस्था शुरू होने के बाद पारंपरिक रजिस्टर प्रणाली को धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे स्कूलों में उपस्थिति से जुड़ी गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी और वास्तविक उपस्थिति का सही आंकड़ा सामने आएगा।

टैब और फेसियल रिकग्निशन से बनेगी हाजिरी

नई व्यवस्था के तहत स्कूलों को उपलब्ध कराए गए टैब के जरिए शिक्षक अपनी और छात्रों की उपस्थिति दर्ज करेंगे। हाजिरी बनते ही यह डेटा सीधे ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज हो जाएगा। इसके साथ ही फेसियल रिकग्निशन सिस्टम का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे फर्जी हाजिरी की संभावना काफी हद तक खत्म हो जाएगी। संबंधित कक्षा के छात्रों की सामूहिक फोटो भी सिस्टम पर अपलोड की जाएगी, ताकि उपस्थिति की सही पुष्टि हो सके।

96 प्रतिशत स्कूलों में पहुंच चुके हैं टैब

शिक्षा विभाग के अनुसार राज्य के 96 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में टैब उपलब्ध कराए जा चुके हैं। हालांकि कुछ जिलों में अब भी टैब वितरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। विभाग ने इन जिलों को जल्द से जल्द व्यवस्था पूरी करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि तय समय सीमा के भीतर टैब से हाजिरी व्यवस्था लागू नहीं करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।

समय की बचत और पारदर्शिता होगी मजबूत

टैब से हाजिरी बनने के बाद शिक्षकों को रजिस्टर पर उपस्थिति दर्ज करने में लगने वाला अतिरिक्त समय नहीं देना पड़ेगा। इससे कक्षा संचालन पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा। साथ ही उपस्थिति में किसी भी तरह की हेराफेरी पर रोक लगेगी। विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था से छात्रों की नियमित उपस्थिति पर बेहतर निगरानी संभव होगी और स्कूलों की जवाबदेही भी तय होगी।

मिड डे मील और योजनाओं में भी मिलेगी सहूलियत

डिजिटल हाजिरी प्रणाली का लाभ मिड डे मील और अन्य शैक्षणिक योजनाओं में भी देखने को मिलेगा। छात्रों की वास्तविक संख्या का सही आंकड़ा मिलने से भोजन और संसाधनों की व्यवस्था अधिक सटीक तरीके से की जा सकेगी। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी और अनियमितताओं पर नियंत्रण होगा।

शिक्षकों को दिया जा रहा है प्रशिक्षण

टैब आधारित हाजिरी प्रणाली को सफल बनाने के लिए शिक्षा विभाग शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षण भी दे रहा है। प्रत्येक स्कूल में एक नोडल शिक्षक को तकनीकी रूप से दक्ष बनाया जा रहा है, जो जरूरत पड़ने पर अन्य शिक्षकों की मदद करेगा। जिला और प्रखंड स्तर पर भी इसकी निगरानी की जा रही है, ताकि किसी तरह की तकनीकी समस्या से व्यवस्था प्रभावित न हो।

जिला-वार स्कूल जहां टैब भेजे जा चुके हैं

जिलाभेजे गए टैब की सं0जिलाभेजे गए टैब की सं0
अररिया2056मधुबनी3247
अरवल599मुंगेर1096
औरंगाबाद2291मुजफ्फरपुर3358
बांका2207नालंदा2439
बेगूसराय1691नवादा1833
भागलपुर2014पश्चिम चंपारण2620
भोजपुर2185पटना3413
बक्सर1252पूर्वी चंपारण3265
दरभंगा2565पूर्णिया2270
गया3436रोहतास2293
गोपालगंज1895सहरसा1348
जमुई1831समस्तीपुर2820
जहानाबाद986सारण2729
कैमूर1349शेखपुरा539
कटिहार1957शिवहर429
खगड़िया1145सीतामढ़ी2218
किशनगंज1502सिवान2352
लखीसराय828सुपौल1763
मधेपुरा1572वैशाली2250

शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा कदम

शिक्षा विभाग का मानना है कि यह पहल बिहार की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाएगी। इससे न सिर्फ स्कूलों में अनुशासन बढ़ेगा, बल्कि छात्रों की नियमित उपस्थिति भी सुनिश्चित होगी। विभाग को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह डिजिटल प्रणाली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभाएगी।

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