सक्षमता-5 परीक्षा: आठ दर्जन शिक्षक संदेह की सूची में, जांच पूरी होने तक अटका प्रमाणपत्र
मुजफ्फरपुर (प्रमुख संवाददाता):। सक्षमता-5 के लिए आवेदन करने वाले शिक्षकों को लेकर जिले में स्थिति अब साफ नहीं रह गई है। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब दस्तावेजों की जांच शुरू हुई, तो करीब आठ दर्जन शिक्षक संदेह की सूची में पाए गए। इनमें से दो दर्जन से अधिक शिक्षकों के सक्षमता प्रमाणपत्रों को संदिग्ध बताया जा रहा है।
यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में भी हलचल तेज हो गई है, क्योंकि बिना जांच पूरी किए किसी को भी सक्षमता प्रमाणपत्र देना नियमों के खिलाफ माना जा रहा है।
24 जनवरी तक पूरी होनी थी प्रक्रिया
सक्षमता-5 के लिए आवेदन करने वाले शिक्षकों के प्रमाणपत्रों से जुड़ी प्रक्रिया 24 जनवरी तक पूरी होनी थी। इसी दौरान जब दस्तावेजों का मिलान किया गया, तो यह सामने आया कि कई शिक्षकों ने आवेदन तो किया है, लेकिन उनके प्रमाणपत्र या तो उपलब्ध नहीं कराए गए हैं या फिर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है।
प्रमाणपत्र देने से बच रहे हैं कुछ शिक्षक
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ शिक्षक अपने मूल प्रमाणपत्र देने से परहेज कर रहे हैं। वहीं, कई मामलों में आवेदन के समय आवश्यक दस्तावेज अपलोड ही नहीं किए गए। इससे जांच प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और पूरे मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सभी दस्तावेजों की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी शिक्षक को सक्षमता प्रमाणपत्र नहीं दिया जाएगा।
चल रही है फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच
सूत्रों के अनुसार, शिक्षकों के फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच कोई नई बात नहीं है। नियोजन विभाग 2015 से फर्जी प्रमाणपत्रों की जांच करता आ रहा है। इस दौरान कई बार ऐसा भी हुआ है कि जांच के समय कभी संबंधित फोल्डर उपलब्ध नहीं होते, तो कभी शिक्षकों की सूची ही गायब पाई जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया में देरी होती रही है।
डीईओ स्तर पर हो रही जांच
पूरे मामले की जांच डीईओ (जिला शिक्षा पदाधिकारी) स्तर पर की जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, सभी संदिग्ध मामलों की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि किन शिक्षकों को सक्षमता प्रमाणपत्र दिया जाएगा और किन मामलों में आगे की कार्रवाई जरूरी होगी।
सक्षमता-5 से जुड़ा यह मामला एक बार फिर प्रमाणपत्र सत्यापन व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है। शिक्षा विभाग का साफ कहना है कि नियमों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा और जांच के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।











