सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए राहत भरी खबर: अब ₹10 लाख तक का मेडिकल खर्च मिलेगा वापस
सरकारी कर्मचारी मेडिकल क्लेम नियम: अगर आप केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं या आपके परिवार में कोई रिटायर्ड पेंशनर है, तो यह खबर आपके लिए काफी काम की है।
अक्सर देखा जाता है कि जब किसी सरकारी कर्मचारी या पेंशनर का इलाज किसी गंभीर बीमारी के लिए होता है जैसे हार्ट सर्जरी, कैंसर या कोई बड़ा ऑपरेशन — तो अस्पताल का खर्च ₹5 लाख से ज्यादा हो जाता है। लेकिन पहले इतने बड़े मेडिकल बिल का पैसा वापस लेने के लिए काफी लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।
₹5 लाख से ज्यादा का मेडिकल क्लेम विभाग खुद से पास नहीं कर सकता था। इसके लिए Integrated Finance Division (IFD) की मंजूरी लेनी पड़ती थी, जिसमें काफी समय लग जाता था। कई बार लोगों को अपने ही पैसे वापस मिलने में महीनों का इंतजार करना पड़ता था।
अब सरकार ने क्या बदलाव किया है?
सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडिकल रिम्बर्समेंट की सीमा बढ़ा दी है:
- पहले अधिकतम सीमा: ₹5 लाख
- अब नई सीमा: ₹10 लाख
अब ₹10 लाख तक का मेडिकल क्लेम मंत्रालय या विभाग के Head of Department (HoD) द्वारा सीधे पास किया जा सकेगा। इसके लिए IFD की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इससे अब मेडिकल क्लेम पास होने की प्रक्रिया पहले से तेज हो जाएगी और पैसा मिलने में देरी कम होगी।
सामान्य इलाज वाले मामलों में भी मिली राहत
ऐसे मामलों में जहां:
- इलाज CGHS के तय रेट के अनुसार हुआ हो
- किसी नियम में कोई छूट नहीं दी गई हो
अब:
- पहले ₹2 लाख तक क्लेम पास होता था
- अब ₹5 लाख तक पास किया जा सकेगा
₹10 लाख तक का क्लेम पाने के लिए जरूरी शर्तें
बढ़ी हुई सीमा का लाभ लेने के लिए इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- CGHS या CS(MA) नियमों में कोई छूट नहीं ली गई हो
- इलाज CGHS के तय पैकेज रेट के अनुसार हुआ हो
- सभी जरूरी दस्तावेज सही तरीके से जमा किए गए हों
सरकारी कर्मचारी मेडिकल क्लेम नियम: पेंशनर्स ऐसे करें आवेदन
रिटायर्ड कर्मचारियों को इलाज पूरा होने या अस्पताल से डिस्चार्ज होने के 6 महीने के अंदर आवेदन करना होगा।
आवेदन करते समय निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे:
- भरा हुआ MRC फॉर्म
- डिस्चार्ज समरी
- वैध CGHS कार्ड
- अस्पताल के ओरिजिनल बिल और रसीद
- रेफरल स्लिप (अगर हो)
- इमरजेंसी सर्टिफिकेट (अगर हो)
- बैंक डिटेल्स के साथ कैंसिल चेक
इस फैसले से अब सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को महंगे इलाज के खर्च से काफी राहत मिलेगी और मेडिकल बिल का पैसा मिलने में पहले जैसी देरी भी नहीं होगी।
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