टीआरई-4 जल्द कराने की मांग, अभ्यर्थियों ने गांधी मैदान में दिया धरना
बिहार में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों ने एक बार फिर अपनी मांग को लेकर आवाज उठाई है। टीआरई-4 (चौथा चरण शिक्षक भर्ती) को जल्द कराने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पटना के गांधी मैदान पहुंचे और गांधी मूर्ति के नीचे धरना दिया। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई साफ जानकारी सामने नहीं आई है।
धरने में शामिल अभ्यर्थियों ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं अभ्यर्थी
अभ्यर्थियों का कहना है कि टीआरई-3 के तीसरे चरण की नियुक्ति के बाद उन्हें उम्मीद थी कि टीआरई-4 की प्रक्रिया जल्दी शुरू होगी। कई महीनों से वे तैयारी में लगे हैं, लेकिन बार-बार तारीख टलने और नोटिफिकेशन न आने से निराशा बढ़ती जा रही है।
कई अभ्यर्थियों ने कहा कि उम्र सीमा और आर्थिक स्थिति भी उनके लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।
बड़ी संख्या में पहुंचे अभ्यर्थी
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में युवा अभ्यर्थी मौजूद थे। सभी के हाथों में पोस्टर और तख्तियां थीं, जिन पर टीआरई-4 जल्द कराने की मांग लिखी थी। अभ्यर्थियों ने बताया कि पहले सरकार की ओर से हजारों पदों पर बहाली की बात कही गई थी, लेकिन अब तक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है।
उनका कहना है कि हजारों पद खाली पड़े हैं, इसके बावजूद भर्ती में देरी समझ से परे है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
धरना दे रहे अभ्यर्थियों ने साफ कहा कि अगर जल्द ही सरकार या आयोग की ओर से कोई ठोस घोषणा नहीं होती है, तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा। उनका कहना है कि टीआरई-4 से जुड़े लाखों अभ्यर्थी इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं और अब सब्र टूटता जा रहा है।
अभ्यर्थियों ने यह भी कहा कि वे मजबूरी में सड़क पर उतरे हैं, क्योंकि उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही।
शिक्षा विभाग पर भी उठे सवाल
अभ्यर्थियों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरक्षण रोस्टर तय न होने और प्रशासनिक देरी के कारण भर्ती प्रक्रिया अटकी हुई है। प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है, फिर भी नियुक्ति नहीं हो रही है।
इसका असर सीधे तौर पर सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है।
शिक्षा विभाग पर भी उठे सवाल
अभ्यर्थियों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आरक्षण रोस्टर तय न होने और प्रशासनिक देरी के कारण भर्ती प्रक्रिया अटकी हुई है। प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी है, फिर भी नियुक्ति नहीं हो रही है।
इसका असर सीधे तौर पर सरकारी स्कूलों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है।
टीआरई-4 को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। लंबे इंतजार और अनिश्चितता के कारण युवाओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब देखना यह होगा कि सरकार और बिहार लोक सेवा आयोग इस मांग पर कब तक कोई ठोस कदम उठाते हैं।
फिलहाल सभी की नजर अगले आधिकारिक ऐलान पर टिकी हुई है।
