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KK PATHAK: स्कूलों में चला के के पाठक का डंडा! राज्य भर के स्कूलों से लाखों बच्चों का नामांकन हुआ रद्द!

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KK PATHAK: स्कूलों में चला के के पाठक का डंडा! राज्य भर के स्कूलों से लाखों बच्चों का नामांकन हुआ रद्द!

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KK PATHAK

KK PATHAK: बिहार शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के के पाठक इन दिनों काफी चर्चा में है। शिक्षा सुधार कार्य में जुटे के के पाठक का डंडा बिहार के कई स्कूलों में चलता हुआ दिख रहा है। शिक्षक उपस्तिथि समेत स्कूली बच्चों की उपस्तिथि को लेकर राजयभर में अभी भी के के पाठक का निरक्षण जारी है।

अपर मुख्य सचिव का यह आदेश था कि ऐसे बच्चे जिनकी उपस्तिथि 75 फीसदी से कम है। वैसे बच्चों का स्कूल से नामांकन रद्द करने का आदेश दिया गया था। जिसके बाद बिहार के लगभग सभी स्कूलों से बच्चों का नामांकन रद्द किया गया।

इतने बच्चों का नामांकन रद्द

13 सितम्बर को जारी हुए रिपोर्ट की बात करें तो 1 लाख 1 हजार 86 बच्चों का नामांकन रद्द किया जा चूका है। जिनमें सबसे ज्यादा अररिया, पश्चिम चम्पारण सहित पटना जिला के स्कूल के बच्चे शामिल है जहाँ बच्चों का सबसे ज्यादा नामांकन रद्द हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार पटना जिले में 7 हजार से ज्यादा बच्चों के नामांकन रद्द हुए जबकि अररिया और पश्चिमी चम्पारण में 10-10 हजार से भी ज्यादा बच्चों के नाम हटाए गए।

इन सभी 1 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों के नामांकन रद्द की बात करें तो सबसे ज्यादा प्राथमिक विद्यालयों से बच्चों के नामांकन को रद्द किया गया है।

KK PATHAK: किन बच्चों का हटेगा नामांकन

अपर मुख्य सचिव के के पाठक (KK PATHAK) के द्वारा यह निर्देश दिया गया था कि ऐसे बच्चे जो 3 दिनों तक स्कूल नहीं आए हैं उन्हें नोटिस दिया जाए और उनके माता पिता से इस बारे में बात किया जाए।

अगर उसके बाद भी 15 दिनों तक बच्चों की अनुपस्तिथि रही तो स्कूल से उनका नामांकन रद्द का दिया जाए। इस आदेश के 10 दिनों के भीतर ही राज्य भर के स्कूलों से लगभग 1 लाख से ज्यादा बच्चों के नामांकन रद्द हुए।

जिसका नामांकन रद्द हुआ उसे दोबारा मिलेगा मौका

जिन बच्चों का नामांकन रद्द किया जा चूका है। अगर वे बच्चे दोबारा स्कूल आते हैं तो उनका एड्मिशन निम्न शर्तों के साथ कर लिया जाएगा।

  • सबसे पहले उनके अभिभावक से शपथ पत्र शपथ लिया जाएगा
  • शपथ पत्र के अनुसार उनके बच्चे रेगुलर स्कूल आएंगे।
  • तब जाकर उनके बच्चे का दुबारा नामांकन हो सकेगा।

के के पाठक के इस कड़े कदम से उनका मानना है कि बिहार शिक्षा विभाग की स्तिथि में काफी सुधार देखने को मिला है। पहले से ज्यादा संख्यां में बच्चे स्कूल आने लगे हैं। और शिक्षकों की उपस्तिथि भी स्कूलों में बढ़ी है।

शिक्षकों पर सख्ती के क्या हैं कारण?

शिक्षा में सुधार के लिए के के पाठक (KK PATHAK) का यह कदम काफी सराहनीय है। लेकिन ऐसा माना जाता है कि शिक्षकों पर सख्ती बरतने के पीछे का कारण पटना में दिए गए शिक्षकों का धरना है। जिसे भूला नहीं जा सकता। जब 11 और 12 जुलाई को बिहार के शिक्षक पटना में धरना पर बैठे थे। इसकी पूरी जानकारी इस वीडियो से समझा जा सकता है।

https://youtu.be/_S6zIGwqCrQ?feature=shared

आपको याद होगा जब बिहार सरकार ने शिक्षकों को परीक्षा देने के बाद राज्यकर्मी का दर्जा देने की बात कही थी। जिसे लेकर शिक्षकों में गुस्सा देखा गया और बिहार के सभी शिक्षक उग्र हो गए थे। जिसके चलते बिहार शिक्षक पटना गाँधी मैदान में धरना देने पहुँच गए थे।

शिक्षकों का काटा गया था छुट्टी

आपको याद होगा जब रक्षा बंधन के समय शिक्षकों को भाई बहन के पावन पर्व पर अपर मुख्य सचिव के के पाठक द्वारा शिक्षकों का छुट्टी काट लिया गया था। और रक्षा बंधन के दिन सभी स्कूलों को खुले रखने का आदेश दिया गया था।

उसपर भी शिक्षकों ने नाराजगी जताई थी और जगह जगह प्रदर्शन किया गया था। कई जगहों पर के के पाठक का पुतला भी जलाया गया था।

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