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राज्य सरकार का ऐलान: मॉडल विद्यालयों के शिक्षकों को दिया जाएगा केंद्रीय विद्यालयों के तर्ज पे मानदेय।

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राज्य सरकार का ऐलान: मॉडल विद्यालयों के शिक्षकों को दिया जाएगा केंद्रीय विद्यालयों के तर्ज पे मानदेय।

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झारखंड: झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो ने मॉडल विद्यालयों के शिक्षकों के लिए एक खुशी की ख़बर दी है।

राज्य सरकार ने झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर सभी घंटी आधारित शिक्षकों को केंद्रीय विद्यालयों की तरह मासिक मानदेय देने का निर्णय लिया है।

बताते चलें कि झारखंड माडल विद्यालयों में कार्यरत जितने अस्थाई शिक्षक जिन्हें घंटी आधारित शिक्षक भी कहा जाता हैं उन्हें केंद्रीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की तरह सैलरी देने का ऐलान 6 जुलाई को सरकार ने कर दिया है।

स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षकों को अब 27,500 रुपये तथा स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों को 26,250 रुपये महीने सैलरी मिलेगी।

घंटी आधारित शिक्षकों की नियुक्ति तथा उनकी कार्यप्रणाली

घंटी आधारित शिक्षकों की नियुक्ति 2011 में हुई थी। उस समय शिक्षकों को 120 रुपये प्रति घंटी के हिसाब से रखा गया था। इनको अधिकतम पांच घंटी के आधार पर रखा गया।

फिर 2016 में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई उन्हें केंद्रीय विद्यालय की तर्ज पर मानदेय दिया जाने लगा। इन शिक्षकों ने 2011 में झारखंड उच्च न्यायालय में समान मानदेय को लेकर याचिका दायर की।

न्यायालय ने समान वेतन देने का आदेश वर्ष 2017 में ही दिया। इस बीच विभाग ने न ताे इस आदेश का अनुपालन किया और न ही कोई अपील दायर की गई।

जब कोई शिक्षकों ने इसमें देरी देखी तो विभाग पर अवमाननवाद दायर कर दिया। जिसकी सुनवाई में न्यायालय ने उक्त आदेश के अनुपालन का आदेश दिया।

झारखंड में केंद्र सरकार के सहयोग से 89 मॉडल स्कूल दो चरणों में खोले गए।

लेकिन अब इन विद्यालयों को पूरी तरह राज्य द्वारा संचालित किया जा रहा है। अब राज्य सरकार इन विद्यालयों को चमकाने में लगी है।

घंटी आधारित शिक्षकों को मिलेगी 15 दिनों से कम अवकाश पर पुरी सैलरी

अगर किसी शिक्षक का अवकाश 15 दिन से अधिक मिलता है तो उसे प्रत्येक कार्य दिवस के समानुपाति राशि मानदेय के रूप में दी जाएगी।

जबकि 15 दिनों से कम अवकाश वाले महीनों में पूरी सैलरी दी जाएगी। अगर शिक्षक द्वारा अवकाश लिया गया हो तब भी समानुपातिक मानदेय दिया जाएगा।

लेकिन ये व्यवस्था सिर्फ माडल विद्यालय के उन शिक्षकों पर लागू होगी जो पूर्व से विद्यालय में घंटी आधारित शिक्षक के रूप में काम कर रहे हैं। विद्यालयों में स्थायी नियुक्ति होने के साथ ही यह व्यवस्था समाप्त हो जाएगी।